मुम्बई । 2011 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के मेंटल कंडिश्निंग कोच रहे पैडी अपटन ने कहा है कि अगर इस साल कोरोना महामारी के कारण आईपीएल नहीं होता है तो कई उभरते हुए क्रिकेटर अवसादग्रस्त हो सकते हैं।  अपटन ने लॉकडाउन के मौजूदा दौर में खिलाड़ियों की मानसिक सेहत पर ध्यान देने की बात कही है। 
अपटन के अनुसार अचानक इतना लंबा ब्रेक आ जाने से केवल खिलाड़ी ही नहीं दुनिया भर के लोगों में तनाव, अवसाद और असुरक्षा की भावना बढ़ना तय है। सभी के सामने इन दिनों रहन-सहन का स्तर बनाये रखने के साथ ही आर्थिक हालातों को ठीक रखना सबसे कठिन है। पैडी ने कहा कि ऐसे में वे उभरते हुए खिलाड़ी जो क्रिकेट के अलावा भी दूसरे खेलों में शामिल रहते हैं केवल उनके लिए ही हालात आसान रहेंगे।  
मानसिक सेहत से जुड़े मामलों के इस कोच ने कहा, 'आईपीएल क्रिकेटर्स के लिए एक बड़ा आयोजन होने के साथ ही वित्तीय रुप से भी कमाई का जरिया रहता है। लॉकडाउन जैसे हालात में तो आम आदमी भी अपने को लेकर ज्यादा सोचता है, ऐसे में खिलाड़ियों का भी खेल को लेकर परेशान रहना काई बड़ी बात नहीं है। इसलिए मैं सभी को यह सलाह दूंगा कि सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं दूसरे लोग भी इन दिनों इस कोरोना के खतरे पर भयभीत न हों बल्कि इसकी जगह वे दूसरी बातों पर अपना ध्यान लगाएं।' साथ ही कहा कि ऐसे समय में अपनी चिंताओं में डूबे रहने से बेहतर रहेगा कि समस्याओं का हल निकाल जाये।  
इन कठिन दिनों में सभी को जीवन के उन सभी पहलुओं पर बराबर ध्यान दें जिससे वे बेहतर इंसान बन सकें। खिलाड़ियों को भी अपनी शारीरिक-मानसिक फिटनेस के अलावा भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। इन दिनों फिट रहने के लिए सामान्य दिनों से ज्यादा सक्रिय रहने की जरूरत है।