नई दिल्ली। बैंकिंग प्रणाली में नित नए तुगलकी फरमान आने के कारण बैंक के ग्राहकों का अरबों रुपया बैंक में फंस गया है। बैंकों द्वारा बैंकिंग व्यवस्था को सुगम बनाने की बजाए हर वर्ष नए नए नियम निकाले जा रहे हैं।
जिसके चलते करोड़ों ग्राहक परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि बैंकों ने नये नियमों को कमाई का जरिया बना लिया है। बहुत से ग्राहकों का पैसा केवाईसी जैसे प्रावधानों के चलते बैंकों में अटका है। बैंक केवाईसी नहीं होने, पैन कार्ड आधार से लिंक नहीं होने, मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होने जैसे अनेक कारण बताकर ग्राहकों का लेन देन रोक देते हैं। इस कारण ग्राहकों को परेशान होना पड़ रहा है। आलम यह है कि जिन ग्राहकों का खाता बैंक में 50 वर्ष से है उन्हें भी केवाईसी देने और आधार को पैन कार्ड से लिंक कराने का कहा जाता है। करोड़ों बैक खाता धारकों के अरबों रुपया बैंक में फंस गये हैं। जमाकर्ताओं का भुकतान बैंक नहीं कर रहे हैं।
देश में ऐसे 17 करोड़ ग्राहक हैं। जिनके पास या तो आधार नहीं है, या फिर पैन कार्ड नहीं है। ऐसे ग्राहकों का ट्रांजैक्शन बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। देश के गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों की बचत पर यह एक तरह बैंकों की डकैती ही है। जिन लोगों ने अपने खून पसीने की कमाई बैंक में जमा कराई है वह अपना पैसा लेने के लिए बैंकों में भटक रहे हैं। 
ऐसे कई ग्राहक हैं, जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं । जिनका लाख- दो लाख रुपया बैंक में पड़ा हुआ है, छोटी मोटी कमी के कारण वे अपना पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं। बहुत से बुजुर्ग लोगों को बैंक के नियम आसानी से समझ में नहीं आते इस कारण वे लगातार परेशान होते हैं। बैंकों के चक्कर काटते-काटते कई बार बुजुर्ग भगवान को भी प्यारे हो जाते हैं  उनका पैसा बैंक की भेंट चढ़ जाता है। बताया जाता है कि ऐसे अनेक बंद अथवा गैर संचालित खाते हैं जिनमें हजारों करोड़ रुपया पड़ा हुआ है यह पैसा उन लोगों का है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई बैंक में जमा कराई थी । बैंक के नियमों के जाल में फंस कर अपना पैसा नहीं निकाल पाए और भगवान को प्यारे हो गए। बैंकिंग प्रणाली को संवेदनशील बनाने का दावा करने वाली हमारी सरकार को बैंकों का यह रवैया दिखाई क्यों नहीं दे रहा। एक तरफ अमीर लोग बैंकों से करोड़ों रुपए का लोन लेकर  डकार रहे हैं। दूसरी तरफ बैंक गरीब ग्राहकों की जेब काटकर उन्हें दिवालिया करने पर आमदा हैं। उल्लेखनीय है कि जमा खाते के संचालन के लिए पेन कार्ड एवं कई प्रमाण पत्र मांगते हैं। देश में करोड़ों लोग आयकर सीमा की परिधि में नहीं आते हैं।  किसानों का अरबों रुपया बचत के रूप में बैंकों में जमा था। अब बैंक के बाईसी का अडंगा लगाकर भुगतान नहीं कर रहे हैं।