भोपाल । नगर निगम में सालों से जारी भर्राशाही पर कोई भी आज तक अंकुश नहीं लगा पाया है। फिर पेट्रोल-डीजल चोरी का मामला हो या सरकारी वाहनों के दुरुपयोग का मामला। वाहनों, मोटरों के स्पेयर पार्टस खराब होने के फर्जी मामले भी कई बार सुर्खियों में आ चुके हैं। ताजा मामला वाहनों में लगाए गए जीपीएस डिवाइस का चर्चा में है। राजधानी में नगर निगम के 950 वाहनों में निगरानी के लिए करोड़ों रुपए की लागत से जीपीएस डिवाइस लगाए गए थे। यह डिवाइस एक हफ्ते में ही बंद पड़ गए। इसके चलते नगर निगम कमिश्नर बी विजय दत्ता ने कंपनी का दो करोड़ रुपए का पेमेंट अटकाने के लिए पत्र लिखा। लिहाजा कंपनी ने आगे काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इधर, जीपीएस के बगैर वाहनों की मॉनीटरिंग फेल हो गई है और इस बात का पता नहीं चल पा रहा है कि कौन सा वाहन कब कहां गया या कहां खड़ा हो गया। बता दें कि कंट्रोल रूम से जीपीएस के जरिए वाहनों की निगरानी की जाती है। इसकी पांच महीनों की रिपोर्ट अधिकारियों ने बनाई थी। इसमें सामने आया कि वाहन जितना डीजल ले रहे हैं, उतना चल नहीं रहे हैं। 
    यह रिपोर्ट कमिश्नर बी विजय दत्ता को सौंप दी गई। उन्होंने इसे आधार बनाते हुए सभी एएचओ, जलकार्य के सहायक यंत्री समेत 42 अधिकारियों को नोटिस दिए थे। उनसे डीजल के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। कई अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। ऐसे में कमिश्नर ने अपर आयुक्त व अन्य अधिकारियों की कमेटी बना दी। यह कमेटी सभी अधिकारियों से उनका पक्ष लेगी। जीपीएस रिपोर्ट के बारे में सवाल करेगी। फिर कमिश्नर को इसकी रिपोर्ट सौंपेगी। तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर छवि भारद्वाज ने ढाई साल पहले स्पेयर पार्ट खरीदी व डीजल चोरी में गड़बड़ी उजागर की थी। इसके बाद जीपीएस लगाने का निर्णय लिया गया था। स्पेयर पार्ट खरीदी व डीजल चोरी में गड़बड़ी उजागर होने के बाद तत्कालीन कमिश्नर का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया था। कमिश्नर के तबादले के बाद यह मामला ठंडे बस्तें में चला गया था।