हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। यह पांच दिन चलने वाले दीपावली उत्सव का पहला दिन होता है। धनतेरस से ही तीन दिन तक चलने वाला गोत्रिरात्र व्रत भी शुरू होता है। आओ जानते हैं इस किए जाने वाले 3 महत्वपूर्ण कार्य।


1. सोना खरीदना : इस दिन सोने या चांदी के आभूषण खरीदने की परंपरा भी है। सोना भी लक्ष्मी और बृस्पति का प्रतिक है इसलिए सोना खरीदें। कुछ लोग सोने या चांदी के सिक्के खरीदते हैं।

2.बर्तन खरीदना : इस दिन पुराने बर्तनों को बदलकर यथाशक्ति ताम्बे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन खरीदते हैं। पीतल के बर्तन लक्ष्मी और बृहस्पति के प्रतीक हैं अत: इस दिन सोना नहीं खरीद पा रहे हैं तो पीतल के बर्तन जरूर खरीदें।
3.धनिया खरीदना : इस दिन जहां ग्रामिण क्षेत्रों में धनिए के नए बीज खरीदते हैं वहीं शहरी क्षेत्र में पूजा के लिए साबुत धनिया खरीदते हैं। इस दिन सूखे धनिया के बीज को पीसकर गुड़ के साथ मिलकर एक मिश्रण बनाकर ‘नैवेद्य’ तैयार करते हैं।

4. नए वस्त्र खरीदना : इस दिन दीपावली पर पहनने के लिए नए वस्त्र खरीदने की परंपरा भी है।

5.अन्य वस्तुएं : इसके अलावा इस दिन दीपावली पूजन हेतु लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, खिलौने, खील-बताशे आदि भी खरीदे जाते हैं।


6.धन्वं‍तरि और लक्ष्मी पूजा : इस दिन समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि देव अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे और माता लक्ष्मी सोने का गढ़ा लेकर प्रकट हुई थी। अत: इस दिन दोनों की पूजा का महत्व है।

7.यम पूजा : धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है।