बद्रीनाथ धाम के कपाट पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ खोले दिये गये हैं। कपाट खुलने के बाद भगवान बद्रीनाथ जी की उत्सव मूर्ति, उद्धव जी मंदिर में प्रवेश करती है। इसके बाद मां लक्ष्मी जी मंदिर से बाहर आ जाती हैं। यात्राकाल के दौरान मंदिर के बगल में 6 महीने लक्ष्मी मंदिर में मां लक्ष्मी विराजमान रहती हैं। शीतकाल में मां लक्ष्मी बद्रीश पंचायत में अंदर बद्रीविशाल के साथ रहती हैं। उद्धव जी पाण्डुकेस्वर के योग ध्यान बद्री मंदिर में रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि उद्धव जी भगवान बद्रीविशाल के बड़े भाई है।
इस दौरान बद्रीनाथ में 6 महीन से जल रही अखंड ज्योति के दर्शनों के लिए देश-विदेश से तीर्थयात्री पहुंचे हुए थे।
कपाट खुलने से पूर्व गर्भगृह से माता लक्ष्मी को लक्ष्मी मन्दिर में स्थापित किया गया। बाबा बद्रीनाथ के दर्शन के लिए हर साल लोग देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं। भगवान विष्णु से कृपा पाने का एक आसान रास्ता बद्रीनाथ धाम से होकर जाता है। श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट अगले 6 महीनों के लिए पूजा के लिए खोल दिये गए हैं। कपाट खुलने के बाद वहां के पुजारी रावल ने ही भगवान के विग्रह को स्नान करवाया है। स्नान के बाद उनका अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है। जिसके बाद आरती करने के बाद उन्हें भोग लगाया जाता है।  
बद्रीनाथ के कपाट खुलते ही अब भक्त दिनभर भगवान बद्रीनाथ जी के निर्वाण दर्शन कर सकेंगे। काली शिला पर बिना श्रृंगार के भगवान का दर्शन निर्वाण दर्शन कहलाता है। शाम को शयन आरती के बाद विशेष पूजा अर्चना और श्रृंगार दर्शन भी होता है।